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🕉️ पितृपक्ष का महत्व 🕉️
पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) हिन्दू धर्म में अपने पूर्वजों को स्मरण और तर्पण करने का विशेष काल माना जाता है। यह अवधि भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से लेकर आश्विन अमावस्या तक (कुल 16 दिन) चलती है।
इस समय श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
✨ पितृपक्ष में किए जाने वाले प्रमुख कार्य:
तिथि अनुसार श्राद्ध एवं तर्पण
पिंडदान एवं ब्राह्मण भोजन
दान–पुण्य (अन्न, वस्त्र, दक्षिणा)
गौ सेवा एवं जरूरतमंदों की सेवा
🌸 लाभ:
पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
घर–परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
पितृदोष का निवारण होता है।
🙏 शास्त्रों में कहा गया है –
"पितृदेवो भव" अर्थात पितरों की सेवा ही परम धर्म है।